शब्द ज्ञान | Shabd Gyan

शब्द ज्ञान

शब्द की परिभाषा – एक या एक से अधिक वर्णों से बने सार्थक समूह को शब्द कहते है। जैसे- (जल = ज+ल, थल = थ+ल, कप = क+प आदि)

शब्द के भेद

शब्द ज्ञान का भेद मुख्यतः तीन प्रकार से किया जाता है-

(i) उत्पत्ति के आधार पर

(ii) रचना के आधार पर

(iii) प्रयोग के आधार पर

1. उत्पत्ति के आधार पर

उत्पत्ति के आधार पर शब्द के पाँच भेद होते है- तत्सम, तद्भव, देशज, विदेशी और संकर।

(i) तत्सम शब्द

वे शब्द जो बिना परिवर्तन के संस्कृत से ज्यों के त्यों हिन्दी भाषा में आए है तथा संस्कृत के समान हिन्दी में भी प्रयुक्त होते है, वे तत्सम शब्द कहलाते है। जैसे- कर्ण, अग्नि, कर्म आदि।

(ii) तद्भव शब्द

संस्कृत भाषा के वे शब्द जिन्हे उच्चारण की सुविधा के लिए परिवर्तित कर हिन्दी में प्रयोग किया जाने लगा, वे तद्भव शब्द कहलाते है। जैसे- कर्ण – कान, अग्नि – आग आदि।

(iii) देशज शब्द

समय, परिस्थिति व आवश्यकतानुसार क्षेत्रीय लोगों के द्वारा जो शब्द काम में लिए गए, वे देशज शब्द कहलाते है। जैसे- खचाखच, मुक्का, फटाफट आदि।

(iv) विदेशी शब्द

हिन्दी भाषा प्रारंभ से लेकर आज तक न जाने कितनी भाषाओं के संपर्क मे आई, जैसे- अंग्रेजी, फारसी, पुर्तगाली, डच, चीनी, नेपाली आदि।

हिन्दी भाषा ने अपनी आवश्यकतानुसर इनको ग्रहण किया। जैसे- अफसर, इंतजार, आलपिन, आलमारी, बक्सा आदि।

(v) संकर शब्द

दो भाषाओ के शब्दों को मिलाकर जो शब्द बनाये गए, वे शब्द संकर शब्द कहलाते है। जैसे- रेलगाड़ी = रेल(अंग्रेजी) + गाड़ी(हिन्दी), वर्षगांठ = वर्ष(संस्कृत) + गांठ(हिन्दी) आदि।

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2. रचना के आधार पर

रचना के आधार पर शब्द के तीन भेद होते है- रूढ शब्द, यौगिक शब्द तथा योगरूढ़ शब्द।

(i) रूढ शब्द

वे शब्द जो किसी दूसरे शब्द या शब्दांश के योग से न बने होते है, रूढ शब्द कहलाते है। इन शब्दों के सार्थक खण्ड नहीं हो सकते। दूसरे शब्दों में, वे शब्द जो किसी व्यक्ति, स्थान, प्राणी और वस्तु के लिए वर्षों से काम में लिए जाने के कारण किसी विशिष्ट अर्थ मे प्रचलित हो गए। जैसे- दूध, पेड़, लड़का, घर, पशु-पक्षी, जानवर आदि।

(ii) यौगिक शब्द

दो शब्दों के योग से बने शब्द यौगिक शब्द कहलाते है।

यौगिक शब्द अपना एक पृथक अर्थ भी देते है और आपस में मिलकर एक नये अर्थ का बोध कराते है। संधि, समास, उपसर्ग एवं प्रत्यय से बने शब्द यौगिग शब्द कहलाते है। जैसे- महा + ऋषि = महर्षि, विद्या + अर्थी = विद्यार्थी आदि।

(iii) योगरूढ़ शब्द

योगरूढ़ शब्दों का निर्माण दो शब्दों के योग से होता है लेकिन वे किसी विशेष अर्थ के लिए रूढ हो जाते है। जैसे- पीताम्बर = पीत(पीला) + अम्बर(वस्त्र) – विष्णु भगवान

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3. प्रयोग/ रूप परिवर्तन के आधार पर

इस आधार के अनुसार शब्दों के दो भेद होते हैं- विकारी शब्द और अविकारी शब्द।

(i) विकारी शब्द

वे शब्द जो लिंग, वचन, काल पुरुष के अनुसार परिवर्तित हो जाते है, वे विकारी शब्द कहलाते है। जैसे- लड़की, गाय आदि।

इन विकारी शब्दों मे संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण आते है। जैसे- लड़की- लड़कियाँ (बहुवचन) लड़का (लिंग परिवर्तन)

(ii) अविकारी शब्द

वे शब्द जिनका लिंग, वचन, कारक, पुरुष के अनुसार रूप परिवर्तित नहीं होता है, अविकारी शब्द कहलाते है। इन शब्दों का रूप सदैव एक जैसा रहता है। अव्यय, क्रिया विशेषण, संबंध बोधक, समुच्चय बोधक, विस्मयादिबोधक शब्द इनमें आते है। जैसे- यथा, तक, वहा, कब, कैसे, अरे!, आदि।

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