राजस्थान के युद्ध | Battles of Rajasthan

Battles of Rajasthan – राजस्थान के सरकारी विभागों द्वारा आयोजित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से ‘राजस्थान के युद्ध‘ बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है। सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में इसमें से प्रश्न अवश्य पूछे जाते है।

Table of Contents

राजस्थान के युद्ध (Battles of Rajasthan)

राजस्थान के युद्ध (Battles of Rajasthan) – (1001 ई. से 1500 ई. तक)

वैहंद का युद्ध (1008 ई.)

पंजाब के शाही वंश के राजा आनंदपाल तथा महमूद गजनवी के मध्य लड़ा गया था जिसमें महमूद गजनवी की जीत हुई। सांभर के चौहानों ने इस युद्ध में आनंदपाल का साथ दिया था।

अजमेर का युद्ध (1135 ई.)

अजमेर के चौहान शासक अर्णोराज और तुर्कों के मध्य लड़ा गया, जिसमें तुर्को की पराजय हुई।

आबू का युद्ध (1178 ई.)

इस युद्ध में गुजरात के शासक मूलराज द्वितीय ने मोहम्मद गौरी को पराजित किया था।

तराईन का प्रथम युद्ध (1191 ई.)*

अजमेर के शासक पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी (मुईजुद्दीन मुहम्मद बिन साम) को पराजित किया था।

तराईन का द्वितीय युद्ध (1192 ई.)

तराईन के द्वितीय युद्ध में मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को पराजित किया था।

नागदा का युद्ध (1234 ई.)

इस युद्ध में मेवाड़ के महाराणा जैत्रसिंह ने दिल्ली सल्तनत के सुल्तान इल्तुत्मिश को पराजित किया था।

रणथंभौर का युद्ध (1301 ई.)

इस युद्ध में अलाउद्दीन ख़िलजी ने रणथंभौर के शासक हम्मीर देव को पराजित किया था। इस युद्ध में रतिपाल और रणमल के धोखे के कारण हम्मीर देव वीरगति को प्राप्त हुआ और रानी रंगदेवी ने जौहर किया।

चित्तौड़ का युद्ध (1303 ई.)

इस युद्ध में अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ के शासक रत्नसिंह को पराजित किया तथा रानी पद्मिनी के नेतृत्व में जौहर किया गया था।

सिवाना का युद्ध (1308 ई.)

अलाउद्दीन ख़िलजी तथा परमार शासक शीतलदेव के मध्य लड़ा गया। इस युद्ध में शीतलदेव की पराजय हुई तथा शीतलदेव के सभी वीर वीरगति को प्राप्त हो गए।

जालौर का युद्ध (1309-11 ई.)

अलाउद्दीन ख़िलजी तथा कान्हडदेव चौहान के मध्य हुआ, जिसमें सभी राजपूत वीरगति को प्राप्त हुए तथा रानियों ने जौहर किया।

सारंगपुर का युद्ध (1437 ई.)

मेवाड़ के शासक महाराणा कुम्भा तथा मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी के मध्य हुआ, जिसमें महाराणा कुम्भा ने विजय की स्मृति में ‘ विजय स्तंभ’ का निर्माण करवाया।

राजस्थान के युद्ध (Battles of Rajasthan) – (1501 ई. से 1700 ई. तक)

खातोली का युद्ध (1517 ई.)

इस युद्ध में महाराणा सांगा ने दिल्ली के सुल्तान इब्राहीम लोदी को बुरी तरह से पराजित किया था।

बांडी का युद्ध (1518 ई.)

इस युद्ध में महाराणा सांगा ने दोबारा दिल्ली के सुल्तान इब्राहीम लोदी को हराया था।

गागरोन का युद्ध (1519 ई.)

गागरोन के इस युद्ध में महाराणा सांगा ने मालवा के शासक महमूद खिलजी द्वितीय को परास्त किया था।

बयाना का युद्ध (1527 ई.)

बयाना का यह युद्ध राणा सांगा और मुगल शासक बाबर के बीच लड़ा गया था, जिसमें बाबर पराजित हुआ था।

खानवा का युद्ध (1528 ई.)

  • खानवा के इस युद्ध में बाबर ने राणा सांगा को पराजित कर ‘ गाजी’ की उपाधि प्राप्त की।
  • इस युद्ध में बाबर ने पहली बार तोपखाने का प्रयोग किया था।

जैतारण का युद्ध (1544 ई.)

शेरशाह सूरी और मालवा के शासक मालदेव के बीच लड़ा गया। इस युद्ध में मालदेव की पराजय हुई। युद्ध की समाप्ति पर शेरशाह सूरी ने कहा था कि ‘ मुठ्ठी भर बाजरे के लिए बादशाह अपनी बादशाहत खो देता’

चित्तौड़गढ़ का युद्ध (1567-68 ई.)

इस युद्ध में अकबर ने महाराणा उदयसिंह को पराजित किया। जयमल और पत्ता इस युद्ध में शहीद हुए।

हल्दीघाटी का युद्ध (1576 ई.)*

  • मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप और मुगल शासक अकबर के सेनापति मानसिंह के मध्य गोगुंदा की पहाड़ियों के बीच स्थित हल्दीघाटी नामक स्थान पर यह अनिर्णायक युद्ध लड़ा गया था।
  • अप्रत्यक्ष रूप से मानसिंह की जीत हुई।
  • अबुल फजल ने हल्दीघाटी के युद्ध को ‘ खमनौर का युद्ध‘ कहा
  • कर्नल जेम्स टॉड ने हल्दीघाटी के युद्ध को ‘ मेवाड़ की थर्मोपॉली‘ कहा था

दिवेर के युद्ध (1576-82 ई.)

हल्दीघाटी के युद्ध के पश्चात् महाराणा प्रताप ने मुगलों के साथ कई युद्ध किये, जिन्हें ‘दिवेर के युद्ध’ के नाम से जाना जाता है।

मतीरे की राड़ (1644 ई.)*

यह युद्ध मतीरे लेने के मामले पर बीकानेर के शासक कर्ण सिंह तथा नागौर के शासक अरम सिंह राठौड़ के मध्य लड़ा गया था।

बहादुरगढ़ का युद्ध (1658 ई.)

इस युद्ध में शाही सेना ने मिर्जा राजा जयसिंह एवं सुलेमान शिकोह के नेतृत्व में शाहसूजा को पराजित किया था।

धरमत का युद्ध (1658 ई.)

इस युद्ध में महाराजा जसवंत सिंह के नेतृत्व में दारा शिकोह की सेना औरंगजेब की सेना से पराजित हुई थी।

दौराई का युद्ध (1659 ई.) 

अजमेर के नजदीक दोराई नामक स्थान पर लड़े गए युद्ध में औरंगजेब की सेना ने दारा शिकोह की सेना को पराजित किया था।

सामुगढ़ का युद्ध (1658 ई.)

इस युद्ध में औरंगजेब की सेना ने दारा शिकोह की सेना को पराजित किया, बूंदी के राव राजा शत्रुसाल सिंह लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।

राजस्थान के युद्ध (Battles of Rajasthan) – (1701 ई. से 1857 ई. तक)

पिलसुद का युद्ध (1715 ई.)

जयपुर के शासक सवाई जयसिंह ने इस युद्ध में मराण सेना को पराजित कर नर्मदा नदी के दक्षिण तक खदेड़ दिया था।

मंदसौर का युद्ध (1733 ई.)

इस युद्ध में मराने की सेना ने सवाई जयसिंह को पराजित कर दिया था।

राजमहल का युद्ध (1747 ई.)

टोंक जिले में बनास नदी के किनारे स्थित राजमहल के मैदान में हुए इस युद्ध में जयपुर के शासक ईश्वरी सिंह ने अपने भाई माधो सिंह तथा इसकी सहायता कर रहे मराणे एवम् कोटा बूंदी की संयुक्त सेना को हराया था।

बगरू का युद्ध (1748 ई.)

इस युद्ध में माधो सिंह ने मराण, मेवाड़ तथा मारवाड़ की सहायता से अपने भाई ईश्वरी सिंह को पराजित किया था।

पिपाड़ का युद्ध (1750 ई.)

इस युद्ध में रामसिंह ने बख्तसिंह को पराजित किया था। रामसिंह की सहायता ईश्वरी सिंह ने तथा बख्तसिंह की सहायता मिरबख्शी सलामत खां ने की थी।

गंगारडा का युद्ध (1754 ई.)

इस युद्ध में मराण सेनानायक जयअप्पा ने जोधपुर महाराजा विजयसिंह, बीकानेर शासक गजसिंह तथा किशनगढ़ के शासक बहादुर सिंह की संयुक्त सेना को हराया था।

भटवाड़ा का युद्ध (1761 ई.)

रणथंभौर दुर्ग के वर्चस्व को लेकर हुए इस युद्ध में कोटा के शासक शत्रुशाल ने जयपुर शासक माधो सिंह को पराजित किया था।

तुंगा का युद्ध (1787 ई.)

जोधपुर महाराजा विजय सिंह तथा अलवर के शासक सवाई प्रताप सिंह की संयुक्त सेना ने मराण सरदार सिंधिया की सेना को पराजित किया था।

लक्ष्मणगढ़ का युद्ध (1778 ई.)

यह युद्ध अलवर के शासक विजय सिंह तथा मिर्जा नजफ खां के बीच हुआ था।

पातण का युद्ध (1790 ई.)

मराण सरदार सिंधिया ने जयपुर एवम् जोधपुर की संयुक्त सेना को पराजित किया था।

गींगोली का युद्ध (1807 ई.)

जयपुर के शासक जगतसिंह ने जोधपुर के शासक मानसिंह को पराजित किया था।

मंगरौल का युद्ध (1821 ई.)

कर्नल जेम्स टॉड एवम् जालिम सिंह की संयुक्त सेना ने कोटा महारावल किशोर सिंह को पराजित किया था।

आडवा का युद्ध (1857 ई.)

ठाकुर कुशाल सिंह ने अंग्रेज और जोधपुर की संयुक्त सेना को पराजित किया था।

राजस्थान के युद्ध (Battles of Rajasthan) – Important Topic for Rajasthan Teacher 1st & 2nd & 3rd Grade Bharti, REET, Patwari Bharti, Gramsevak bharti and etc..

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