राजस्थान में कृषि, फसल और उत्पादन

राजस्थान में कृषि प्रमुख रूप से वर्षा पर ही निर्भर है, क्यूंकि राज्य के कुल कृषि योग्य क्षेत्र के लगभग 30 प्रतिशत भाग में ही सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है। यहाँ के सिंचाई सुविधा वाले क्षेत्रों में मार्च से जून की अवधि में जायद फसल की पैदावार की जाती है।

जायद की राजस्थान में प्रमुख फसले उड़द, मूंग, तरबूज, कद्दू, आदि है। उड़द एवं मूंग का सर्वाधिक उत्पादन बांसवाड़ा जिले में होता है। कद्दू का सर्वाधिक उत्पादन गंगानगर एवं हनुमानगढ़ जिलों में होता है। राजस्थान में सर्वाधिक क्षेत्र में बोई जाने वाली फसल बाजरा है। राजस्थान का अन्न का कटोरागंगानगर‘ को कहा जाता है।

राजस्थान में कृषि, फसल और उत्पादन (Agriculture in Rajasthan)

भारत में राजस्थान एक कृषि प्रधान राज्य है। यहाँ के अधिकतर निवासी जीवन निर्वाह के लिए कृषि से जुड़े हुए है। राजस्थान की लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या का रोजगार का साधन कृषि एवं इससे संबद्ध क्षेत्र है।

राज्य को कृषि तथा इससे संबंधित क्षेत्रों से जो आय होती है, वह सम्पूर्ण राज्य की आय का लगभग 32 प्रतिशत है। राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 34.2 लाख हेक्टेयर में से 27.7 लाख हेक्टेयर क्षेत्र ही कृषि करने के लिए उपलब्ध है।

मिश्रित कृषि / मिश्रित खेती

एक ही ऋतु में दो या दो से अधिक फसलों की एक साथ खेती करना तथा साथ-साथ पशुपालन कार्य करना मिश्रित कृषि या मिश्रित खेती कहलाता है। राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में कम बारिश और बारिश की असमानता के कारण मिश्रित कृषि का प्रचलन अधिक है। मिश्रित खेती की फसलें बाजरा, मूंग, मोठ, ग्वार और तिल प्रमुख हैं।

फसलों का वर्गीकरण – राजस्थान में कृषि 

1. जीवन चक्र के आधार पर

(i) एक वर्षीय फसलें – ये एक वर्ष में पूर्ण होने वाली है। गेंहू, चना, जौ और सोयाबीन प्रमुख है।

(ii) द्विवर्षीय फसले – इनका जीवन काल 2 वर्ष तक रहता है। इसमे चुकंदर प्रमुख है।

(iii) बहुवर्षीय फसलें – इन फसलों में अनेक वर्षों तक जीवित रहने की क्षमता रहती है। जैसे- लुर्सन, नेपियर घास आदि।

2. ऋतु के आधार पर

(i) खरीफ की फसलें

(अ) खरीफ की प्रमुख फसलें धान, मक्का, ज्वार, मूंग, मूंगफली, लोबिया, कपास, जूट, बाजरा, ग्वार, तिल, मोठ आदि है।

(ब) खरीफ की फसलों की बुवाई जुलाई में और कटाई अक्टूबर महीने में की जाती है।

(ii) रबी की फसलें

(अ) रबी की प्रमुख फसलें जौ, राई, गेहूँ, जई, सरसों, मैथी, चना, मटर आदि है।

(ब) रबी की फसल की बुवाई अक्टूबर में तथा कटाई अप्रैल महीने में की जाती है।

(iii) जायद की फसलें

(अ) जायद की प्रमुख फसलों में तरबूज, खरबूजा, टिंडा, ककड़ी, खीरे, मिर्च आदि है।

(ब) जायद की फसल की बुवाई मार्च में तथा कटाई जून महीने में की जाती है।

3. उपयोग के आधार पर

(i) खाद्यान फसलें – राजस्थान की खाद्यान फसलें गेहूँ, चावल (धान), बाजरा, जौ, मक्का, ज्वार, दलहन, तिलहन प्रमुख है।

(ii) वाणिज्यिक फसलें – राजस्थान की वाणिज्यिक फसलें कपास और गन्ना है।

(iii) पेय फसलें – राजस्थान की पेय फसल तंबाकू और अफीम है।

(iv) रेशेदार फसलें – राजस्थान की रेशेदार फसलें कपास और सन है।

(v) चारा फसलें – राजस्थान में चारे की फसलें बरसींम, रिजका और जई हैं।

(vi) मसालें की फसलें – राजस्थान की मसालें की फसलें सौंफ, मैथी और जीरा प्रमुख है।

प्रमुख फसलें और उत्पादन क्षेत्र – राजस्थान में कृषि 

1. गेहूँ

  • भारत में राजस्थान का गेहूँ उत्पादन में पाँचवा स्थान है।
  • राजस्थान का प्रमुख खाद्यान गेहूँ है।
  • गेहूँ का वानस्पतिक नाम ‘ट्रिटिकम स्पीसीज’ है।
  • गेहूँ ग्रेमिनी कुल का पौधा है।
  • राज्य में लगभग 17.7 लाख हेक्टेयर भूमि अर्थात कृषि क्षेत्रफल के 9.6 प्रतिशत भाग पर गेहूँ की खेती की जाती है।
  • गेहूँ के लिए वर्षा 60 सेमों. से 100 सेमी. तक होनी चाहिए।
  • राजस्थान में गेहूँ उत्पादन में गंगानगर का प्रथम स्थान है।
    गेंहू की फसल
    गेंहू की फसल – राजस्थान में कृषि
  • राजस्थान में गेहूँ उत्पादक जिलें गंगानगर, हनुमानगढ़, जयपुर, कोटा, बूँदी, बारां, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, अजमेर, बांसवाड़ा प्रमुख है।
  • यह राज्य में सर्वाधिक सिंचित क्षेत्र वाली फसल है।

2. चावल

  • चावल का वानस्पतिक नाम ओराइजा सेटाईवा है।
  • इसकी कृषि के लिए वर्षा 125 सेमी. 200 सेमी. तक तथा औसत तापमान 20° C से 27° C तक होना चाहिए।
  • चावल के लिए मृदा का ph मान 4-6 होना चाहिए।
  • राजस्थान में चावल का उत्पादन बांसवाड़ा, हनुमानगढ़, बारां, गंगानगर, कोटा, बूँदी, सवाई माधोपुर जिलों में होता है।
  • “मोही सुगन्धरा’ राजस्थान में चावल की एक किस्म है, जो बासमती चावल के समान है।

3. बाजरा

  • बाजरा राजस्थान के शुष्क मरुस्थलीय क्षेत्र की प्रमुख खाद्यान फसल है।
  • बाजरा का वानस्पतिक नाम पेलिसेटम टाइफोड़की है। बाजरा ग्रेमिनी कुल का पौधा है।
    बाजरा की फसल
    बाजरा की फसल – राजस्थान में कृषि
  • यह रेतीली भूमि और अल्पवर्षा में होता है।
  • बाजरा के लिए वर्षा 20 सेमी. से 35 सेमी. तथा औसत तापमान 25°C से 35°C तक होना उपयुक्त है।
  • राजस्थान में बाजरा उत्पादन में बाड़मेर अग्रणी जिला है। इसके अलावा जोधपुर, सीकर, झुंझुनू, नागौर, बीकानेर और पाली प्रमुख उत्पादक जिलें है।

4. ज्वार

  • यह शुष्क एवं अर्द्धशुष्क जलवायु वाली फसल है।
  • इसका उपयोग खाने के साथ-साथ पशुओं के चारे में किया जाता है।
  • ज्वार के लिए औसत बारिश 50 सेमी. से 120 सेमी. चाहिए।
  • राजस्थान में कोटा जिले का ज्वार उत्पादन में प्रमुख स्थान है। इसके अलावा अजमेर, उदयपुर, भीलवाड़ा और धौलपुर प्रमुख उत्पादक जिलें है।
  • ज्वार को सूखे की प्रतिरोधी क्षमता के कारण ‘ऊँट की फसल’ कहा जाता है।

5. जौ

  • इसका वानस्पतिक नाम ‘होर्डियम वल्गेयर’ है।
  • जौ ग्रेमिनी कुल का पौधा है।
  • इसकी फसल के लिए 50 सेमी. से 80 सेमी. वर्षा तथा शुष्क और बालू मिश्रित काँप मिट्टी की आवश्यकता होती है।
  • राजस्थान में जौ का सर्वाधिक उत्पादन जयपुर जिले में होता है। इसके अलावा अजमेर और दौसा प्रमुख उत्पादक जिलें है।

6. मक्का

  • मक्का खरीफ की एक प्रमुख फसल है।
  • इसका उपयोग दक्षिणी राजस्थान में खाद्यान के रूप में किया जाता है।
  • यह एक औद्योगिक महत्त्व की फसल है। राजस्थान में मक्का उत्पादन में उदयपुर अग्रणी जिला है।
  • इसके अलावा राजसमंद, झालावाड़, चित्तोडगढ़, भीलवाड़ा, बांसवाड़ा और डूँगरपुर जिलों में खेती की जाती है।
  • राजस्थान में मक्का की उन्नत किस्में ‘माही कंचन’ तथा ‘माही धवल’ है।

7. चना

  • यह राज्य में रबी की सबसे प्रमुख दलहनी फसल है।
  • चना का कॉमन नाम ‘चिक पी’ है।
  • राज्य में प्रमुख उत्पादक क्षेत्र बीकानेर, सीकर, चुरू और हनुमानगढ़ है।
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से बाजरा और गेहूँ के बाद चने की फसल का स्थान है।
  • चने के फल को आम भाषा में ‘फली‘ (Pod) कहते है।

8. गन्ना

  • गन्ना उष्णकटिबंधीय जलवायु का पौधा है।
  • इसके लिए वर्षा 100 सेमी. से 200 सेमी. तथा औसत तापमान 15°C से 24°C होना चाहिए।
  • इसके लिए कांपीय मृदा उपयुक्त होती है।
  • गन्ना मूल रूप से भारतीय पौधा है।
  • गन्ने के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र गंगानगर, बूँदी, उदयपुर और हनुमानगढ़ है।
  • गन्ना उत्पादन में बूँदी का राजस्थान में प्रथम स्थान है।

9. कपास

  • कपास एक महत्वपूर्ण व्यापारिक फसल है।
  • कपास का मुख्य उपयोग सूती वस्त्र के निर्माण में किया जाता है तथा इसके बिनोलों से तेल एवं पशुओं के लिए खाद्य तैयार किया जाता है।
  • इसकी खेती के लिए काली और चिकनी मिट्टी की आवश्यकता होती है।
  • कपास के लिए वर्षा 50 सेमी. से 100 सेमी., औसत तापमान 20°C से 30°C तक तथा लगभग 90 दिन तक पाला रहित मौसम रहना उपयुक्त है।
  • राजस्थान का कपास उत्पादन के क्षेत्र में भारत में सातवाँ स्थान है तथा भारत का विश्व में दूसरा स्थान है।
  • राजस्थान में कपास उत्पादक प्रमुख क्षेत्र गंगानगर और हनुमानगढ़ है।

10. मूँगफली

  • यह तिलहन की फसल है।
  • मूंगफली का वानस्पतिक नाम ‘अरेकीस हाइपोजिया’ है।
  • यह लेग्युमिनोसी कुल का पौधा है।
  • इसके लिए वार्षिक वर्षा 50 से 75 सेमी. तथा तापमान 30°C से 35°C तक होना उपयुक्त है।

11. सरसों

  • यह राज्य की प्रमुख तिलहन की फसल है।
  • सरसों के लिए शीत एवं शुष्क जलवायु आवश्यक है।
  • इसके लिए वार्षिक वर्षा 75 सेमी. से 100 सेमी. तथा औसत तापमान 15°C से 20°C तक होना उचित है।
    सरसों की फसल
    सरसों की फसल – राजस्थान में कृषि
  • सरसों उत्पादन में गंगानगर जिले का राजस्थान में सर्वोच्च स्थान है।

राजस्थान में कृषि अनुसंधान केंद्र 

1. राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान केंद्र – सेवर (भरतपुर जिला)

2. केन्द्रीय मरुक्षेत्र अनुसंधान संस्थान (CAZRI) – जोधपुर

3. राजस्थान में कृषि अनुसंधान उपकेन्द्र – हनुमानगढ़

4. अखिल भारतीय खजूर अनुसंधान केंद्र – बीकानेर

5. जैतसर कृषि फार्म – गंगानगर

6. सूरतगढ़ यांत्रिक कृषि फार्म – गंगानगर

राजस्थान में कृषि

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