राजस्थान के प्रमुख मेले

राजस्थान में मेलों का प्रचलन प्राचीन काल से ही रहा है। राजस्थान के प्रमुख मेले किसी एतिहासिक कथानक अथवा परंपरा से जुड़े हुए हैं। इन मेलों का आयोजन किसी देवता या देवी के मंदिर, थान पर किया जाता है।

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राजस्थान के प्रमुख मेले 

राजस्थान में आयोजित होने वाले मेलों में राजस्थानी लोक संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। इनमें सांप्रदायिक सद्भाव और एकता का समन्वय पाया जाता है।

राजस्थान में आदिवासियों के मेले भी बहुत प्रसिद्ध है। इसके अलावा राजस्थान में पशु मेलों का आयोजन भी किया जाता है, जहां पशुओं की खरीदारी की जाती है।

राजस्थान में लोक देवताओं के मेले

(1) वीर तेजाजी मेला

यह मेला भाद्रपद शुक्ल दशमी के दिन सुरसुरा (अजमेर) में आयोजित होता है।

(2) गौतमेश्वर मेला

यह मेला गौतमेश्वर (अरणोद, प्रतापगढ़) में वैशाख पूर्णिमा के दिन आयोजित होता है।

(3) भूरिया बाबा का मेला

यह मेला पाली जिले में 13 अप्रैल से 15 मई तक आयोजित किया जाता है।

(4) रामदेवरा का मेला (रूनीचा मेला)

यह मेला रामदेवरा, जैसलमेर में भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से एकादशी तक आयोजित होता है।

(5) बाबा रामदेव मेला

मसूरिया, जोधपुर में भाद्रपद शुक्ल द्वितीया के दिन भरता है।

(6) देवजी मेला

यह मेला आसींद (भीलवाड़ा) और चित्तौड़गढ़ में भाद्रपद शुक्ल अष्टमी के दिन आयोजित किया जाता है।

क्रमांक मेला आयोजन स्थान आयोजन मास (महिना)
(1)

केसरिया जी का मेला

धूलेव (उदयपुर) कार्तिक और वैशाख की पूर्णिमा के दिन
(2)

पाबूजी का मेला 

कोलूमंड अश्विन शुक्ल दशमी (दशहरा) के दिन
(3)

मल्लीनाथजी का मेला

मसूरिया (जोधपुर) भाद्रपद शुक्ल द्वितीया को
(4)

माकड़जी का मेला

अजमेर आषाढ़ शुक्ल द्वितीया
(5)

सवाई भोज का मेला

सवाईभोज (भीलवाड़ा) भाद्रपद शुक्ल अष्टमी

राजस्थान में लोक देवियों के मेले

(1) शीतला माता का मेला

यह मेला चाकसू (जयपुर) में शील की डूँगरी पर स्थित शीतला माता मंदिर में चैत्र मास की कृष्ण सप्तमी-अष्टमी के दिन भरता है। इस दिन ठंडे भोजन का भोग लगाया जाता है। इस दिन को ‘बास्योड़ा’ भी कहते है। शीतला माता का वाहन गधा और पुजारी कुम्हार है।

(2) कैलादेवी मेला

यह मेला करौली जिले में कैलादेवी स्थान पर चैत्र शुक्ल अष्टमी से दशमी तक आयोजित होता है। ‘लांगुरिया’ गीत कैलादेवी के भक्तों द्वारा गाये जाने वाले गीतों को कहा जाता है।

(3) नारायणी माता का मेला

यह मेला सरिस्का (अलवर) जिले में बरवा डूँगरी पर स्थित नारायणी माता के मंदिर में वैशाख शुक्ल एकादशी के दिन भरता है।

(4) जीणमाता का मेला

माता जीण का मेला सीकर जिले में रेवासा के पास हर्ष की पहाड़ी पर स्थित जीणमाता के मंदिर में चैत्र और आश्विन के नवरात्रों में आयोजित होता है। यहाँ पर जीणमाता की अष्ट भुजा की प्रतिमा स्थापित है।

(5) करणी माता का मेला

यह देशनोक (बीकानेर) में स्थित करनी माता के मंदिर में चैत्र और आश्विन के नवरात्रों में आयोजित होता है।

राजस्थान के प्रमुख मेले

क्रमांक मेला आयोजन स्थान आयोजन मास (महिना)
(1)

बाणगंगा मेला

विराटनगर (जयपुर) वैशाख की पूर्णिमा
(2)

चौथमाता का मेला

बरवाड़ा (सवाई माधोपुर माघ की कृष्ण चतुर्थी
(3)

वीरातारा माता

वीरातारा (बाड़मेर) भाद्रपद, माघ तथा चैत्र मास की शुक्ल चतुर्दशी
(4)

राणीसती का मेला

झुंझुनू भाद्रपद की अमावस्या
(5)

मनसा माता का मेला

झुंझुनू चैत्र मास की कृष्ण अष्टमी तथा आश्विन सुदी अष्टमी के दिन
(6)

शाकंभरी माता का मेला

सांभर (जयपुर) चैत्र और आश्विन के नवरात्रों में आयोजित होता है।
(7)

दधिमति माता का मेला

गोठ माँगलोद (नागौर) चैत्र और आश्विन के नवरात्रों में आयोजित होता है।
(8)

बीजासण माता का मेला

इन्द्रगढ़ (बूँदी) चैत्र और आश्विन के नवरात्रों में आयोजित होता है।
(9)

आजम माता का मेला

रीछेड़ (राजसमंद)
(10)

भँवर माता का मेला

प्रतापगढ़
(11)

धनोप माता का मेला

धनोप गाँव (भीलवाड़ा) चैत्र मास की कृष्ण प्रतिपदा से दशमी तक
(12)

नागणेची मेला

बीकानेर चैत्र और आश्विन के नवरात्रों में आयोजित होता है।
(13)

महोदरी माता का मेला

मोदरा (जालोर) चैत्र और आश्विन के नवरात्रों में आयोजित होता है।
(14)

कुण्डालिनी माता का मेला

मातृकुंडिया (रश्मि), चित्तौड़गढ़ वैशाख मास की पूर्णिमा के दिन

राजस्थान के प्रमुख मेले

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