राजस्थान की झीलें | Lakes of Rajasthan

राजस्थान में प्राकतिक झीलों के साथ-साथ कई खूबसूरत कृत्रिम (मानव निर्मित) झीलें भी हैं। ये प्राकृतिक एवं कृत्रिम राजस्थान की झीलें अपने अनुपम सौन्दर्य के कारण देशी-विदेशी पर्यटकों का मन मोहती हैं।

राजस्थान की झीलें

राज्य राजस्थान वीरता और शौर्य की भूमि के साथ-साथ अपनी चट्टानी मरुभूमि में झीलों की अपार सम्पदा समेटे हुए है। राजस्थान में मीठे पानी की झीलों के साथ-साथ खारे पानी की झीलें भी हैं। खारे पानी की झीलें टैथिस महासागर के अवशेष के रूप में विद्यमान है।

राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों में वायु निर्मित झीलों का निर्माण हआ है। सांभर, डीडवाना. पंचपद्रा, लूनकरनसर आदि वायु निर्मित झीलों के उदाहरण हैं।

मरुस्थलीय क्षेत्रों में वायु के अपरदनात्मक कार्य के फलस्वरूप धरातल की सतह असमान हो जाती है और यत्र-तत्र अनेक गड्ढों और बेसिनों का निर्माण हो जाता है। वर्षाकाल में ये गड्डे और बेसिन जल से भर जाते हैं और झील का रूप ग्रहण कर लेते हैं। इस प्रकार की झीलें खारे जल वाली झीलें होती हैं। ये झीलें अस्थायी प्रकृति की होती है। ग्रीष्म काल में इन झीलों का जल सूख जाता है और उसकी सतह पर लवण (नमक) की परत दृष्टिगत होती हैं।

खारे जल की प्रायः सभी राजस्थान की झीलें नमक का प्रमुख स्रोत है। यही कारण है कि राजस्थान तटवर्ती राज्य न होते हुए भी भारत का प्रमुख नमक उत्पादक राज्य है।

राजस्थान की झीलें सामान्यतया दो वर्गों में विभाजित की गई है-

(1) खारे पानी की झीलें

(2) मीठे पानी की झीलें

खारे पानी की झीलें (Salt Water Lakes)

राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र में बालू मिट्टी के टीलों की बीच नीची भूमि में वर्षा जल के भर जाने से भी झीलें बन जाती हैं। सांभर, डीडवाना, लूणकरणसर व पचपदरा ऐसी ही राजस्थान की झीलें हैं। राजस्थान में इन्हें ढांढ व सर (तलाई) कहा जाता हैं। राजस्थान राज्य में खारे पानी की झीले मुख्यतः राजस्थान के उत्तरी-पश्चिमी मरूस्थली भाग में पाई जाती है।

खारे पानी की सर्वाधिक राजस्थान की झीलें नागौर जिले में हैं। भूमिगत जल से लवण निर्माण में राजस्थान का देश में सर्वोच्च स्थान है। राजस्थान की झीलों में नमक की अधिक मात्रा पाये जाने का कारण यहाँ ग्रीष्म ऋतु में चलने वाली दक्षिणी-पश्चिमी मानसूनी हवाएँ हैं। ये अपने साथ कच्छ की खाड़ी से सोडियम क्लोराइड के कणों को राजस्थान की ओर लाती है। राजस्थान में खारे पानी की झीलें निम्नानुसार है।

1. सांभर झील

  • सांभर झील का फैलाव जयपुर, नागौर और अजमेर जिलों में है।
  • यह जयपुर शहर से 65 किमी दूर पश्चिम में स्थित है।
  • सांभर झील राजस्थान की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है।
  • यह झील 240 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली हई है।

2. डीडवाना झील

  • डीडवाना झील नागौर जिले में डीडवाना शहर के पास में स्थित है।
  • इस झील की लंबाई 4 किलोमीटर तथा चौड़ाई 3 से 6 किलोमीटर तक है।
  • यह सांभर झील से उत्तर-पश्चिम में 65 किमी की दूरी पर स्थित है।
  • इस झील के पानी से वर्ष भर नमक तैयार किया जाता है।
  • डीडवाना झील का नमक खाने के अयोग्य होने के कारण इससे प्राप्त नमक से सोडियम प्राप्त किया जाता है।
  • डीडवाना झील से नमक का उत्पादन करने वाली निजी संस्थाओं को स्थानीय भाषा में ‘देवल’ कहा जाता है।

3. पंचपद्रा झील

  • यह झील बाड़मेर जिले में पंचपद्रा नगर के निकट झील लगभग 25 वर्ग किमी क्षेत्र में विस्तृत है।
  • पंचा नामक भील द्वारा दलदल को सूखाकर इस झील का निर्माण किया गया था।
  • पंचपद्रा झील से सर्वोच्च कोटि का नमक प्राप्त होता है।
  • पंचपद्रा झील के नमक में 98 प्रतिशत सोडियम क्लोराइड पाया जाता है। इस झील का प्राचीन नाम पंचभद्रा है।

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4. लूनकरनसर

  • यह झील बीकानेर से 80 किमी उत्तर-पूर्व में लूनकरनसर कस्बे के समीप स्थित है।
  • इस झील के में लवणीयता की कमी है। अतः इस झील से बहुत कम मात्रा में नमक का उत्पादन होता है।

खारे पानी की उपर्युक्त झीलों के अतिरिक्त रैवासा और कौछोर झील (सीकर), फलौदी (जोधपर), कावोद (जैसलमेर) तथा तालछापर (चुरू) आदि भी  खारे पानी की झीलें है।

मीठे पानी की झीलें (Fresh Water Lakes) 

  • उदयपुर में राजस्थान की सबसे ज्यादा झीलें पाई जाती है।
  • राजस्थान की मीठे पानी की सबसे ज्यादा झीलें उदयपुर जिले में है।

1. जयसमन्द झील

  • जयसमन्द झील को ढेबर झील के नाम से भी जाना जाता है।
  • यह झील उदयपुर शहर से 50 किमी दक्षिण-पूर्व में स्थित है।
  • जयसमन्द झील का निर्माण राजा जयसिंह ने 1685-1691 में गोमती नदी पर बांध बनाकर (2 जून 1691) किया था। यह बांध 375 मीटर लम्बा एवं 35 मीटर ऊंचा है। इस बाँध पर महाराणा जयसिंह द्वारा ‘नर्मदेश्वर महादेव’ का मंदिर बनाया गया है। बाँध के दक्षिणी छोर पर बने महल ‘महाराज कुमार के महल’ कहे जाते हैं।
  • महाराणा जयसिंह का बचपन का नाम ढेबर था और इस झील का नाम उन्हीं के नाम पर ढेबर झील रखा गया था।
  • महाराणा जयसिंह ने इस झील का नाम जयसमंद (जयसमुद्र) रखा और उसके किनारे अपनी सबसे छोटी रानी कोमलादेवी का ‘रूठी रानी का महल‘ और चित्रित हवा महल का निर्माण करवाया था।
  • जयसमन्द झील में 9 नदियों और 99 नालों का पानी आता है।
  • वर्तमान में इसमें गोमती, झमरी, रूपारेल और बागार इन चार नदियों का पानी भरता है।
  • जयसमन्द झील राजस्थान की सबसे बड़ी कृत्रिम झील है।
  • जयसमन्द झील राजस्थान की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है।
  • यह झील लगभग 15 किमी लम्बी एवं 8 किमी चौड़ी है।
  • जयसमन्द झील में लगभग 7 द्वीप (टापू) हैं जिस पर भील एवं मीणा जनजाति के लोग रहते हैं। सबसे बड़ा टापू ‘बाबा का भागड़ा‘ तथा सबसे छोटा टापू ‘प्यारी’ है।
  • इस झील में 6 कलात्मक छतरियां एवं प्रासाद बने हुए हैं, जो अत्यंत ही सुन्दर और रमणीय हैं।
  • जयसमन्द झील पहाड़ियों से घिरी हुई है।
  • यह झील जयसमंद वन्यजीव अभयारण्य का एक अंग है।
  • जयसमंद झील की पृष्ठभूमि में पलाश के वृक्ष विद्यमान हैं।

2. राजसमन्द झील

  • यह झील उदयपुर से 64 किमी दूर कांकरौली स्टेशन के निकट स्थित है।
  • इस झील निर्माण 17वीं शताब्दी में 1662 ई. में महाराजा राजसिंह द्वारा गोमती नदी पर प्रारम्भ कराया गया जो 1680 ई. में पूर्ण हुआ।
  • यह गोमती, केलवा तथा ताली नदियों पर स्थित है।
  • यह झील 6.5 किमी लम्बी तथा 3 किमी चौड़ी है।
  • राजसमंद झील का पानी पेयजल एवं सिंचाई के लिए प्रयुक्त होता है।

  • राजसमंद राज्य की एकमात्र झील है जिस पर किसी जिले (राजसमंद) का नामकरण हुआ है।

  • इस झील का उत्तरी भाग ‘नौचौकी’ के नाम से प्रसिद्ध है जहां संगमरमर के 25 शिलालेखों पर मेवाड़ का इतिहास संस्कृत भाषा में अंकित है।

3. पिछोला झील

  • इस झील का यह नाम पिछोला नामक गांव के आधार पर पड़ा है।
  • पिछोला झील के मध्य में जग मन्दिर एवं जग निवास महल है जिसका प्रतिबिम्ब झील में दिखाई देता है ।
  • यह झील 4किमी लम्बी तथा 3 किमी चौडी है।
  • इस झील का निर्माण 14वीं शताब्दी के अंत में राणा लाखा के शासनकाल में एक बन्जारे ने कराया था।
  • उदयपुर नगर की स्थापना के समय महाराजा उदय सिंह ने इस सुन्दर झील को विस्तृत रूप दिया।
  • पिछोला झील उदयपुर की सबसे सुन्दर एवं प्रसिद्ध झील है।

  • राजस्थान का सबसे बड़ा राज प्रासाद पिछोला झील के किनारे स्थित है।

  • उदयपुर का ‘सिटी पैलेस’ पिछोला झील के पूर्वी किनारे पर स्थित है।

  • शाहजहां को ताजमहल बनाने की प्रेरणा इसी झील के दृश्या देखकर मिली थी।

  • जग मंदिर और जग निवास-पिछोला झील में दो टापुओं पर ये दो महल बने हुए हैं। वर्तमान में ये दोनों राजस्थान पर्यटन विकास निगम के अधीन है तथा इन्हें होटल के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है।
  • पिछोला झील फतेहसागर झील से जुड़ी हुई है।

संदर्भ

पर्यटन उद्योग के लिए राजस्थान की झीलें एक तरह से उत्प्रेरक का कार्य करती हैं, वहीं ये झीलें पेयजल की दृष्टि से काफी उपयोगी है। अपर समीपवर्ती शहरों, नगरों एवं कस्बों को न केवल इनके द्वारा पेयजल की आपूर्ति की जाती है, अपितु राजस्थान की इन झीलों से कृषि भूमियों की सिंचाई भी की जाती है।

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