राजस्थान का एकीकरण | Integration of Rajasthan

राजस्थान का एकीकरण 19 रियासतों, 3 ठिकानों (लावा, कुशलगढ़ तथा नीमराना) और एक केंद्र शासित प्रदेश (अजमेर-मेरवाड़ा) का विलय करके किया गया था। राजस्थान राज्य का निर्माण 17 मार्च 1948 को शुरू हुआ और 1 नवंबर 1956 को पूर्ण हुआ।

राजस्थान का एकीकरण

सरदार वल्लभ भाई पटेल की अध्यक्षता में 5 जुलाई 1947 ई. को रियासती सचिवालय की स्थापना की गई थी, जिसमे वी. पी. मेनन को रियासती सचिवालय का सचिव बनाया गया था। यह एकीकरण कुल मिलाकर 8 वर्ष 7 महीना एवम् 15 दिन में पूर्ण हुआ। राजस्थान का एकीकरण कुल 7 चरणों में पूर्ण हुआ, जो इस प्रकार हैं-

  1. प्रथम चरण (मत्स्य संघ का निर्माण)
  2. द्वितीय चरण (पूर्व राजस्थान का निर्माण)
  3. तृतीय चरण (संयुक्त राजस्थान का निर्माण)
  4. चतुर्थ चरण (वृहत् राजस्थान का निर्माण)
  5. पंचम चरण (संयुक्त वृहत् राजस्थान का निर्माण)
  6. षष्टम चरण (राजस्थान संघ का निर्माण)
  7. सप्तम चरण (वर्तमान राजस्थान का स्वरूप)

1. प्रथम चरण (मत्स्य संघ का निर्माण) – 18 मार्च 1948 ई.

  • 18 मार्च 1948 ई. को 4 रियासतों (अलवर, भरतपुर, धौलपुर तथा करौली) तथा 1 ठिकाना (नीमराना) को मिलाकर ‘मत्स्य संघ का निर्माण किया गया।मत्स्य संघ - राजस्थान का एकीकरण
  • मत्स्य संघ नामकरण के सलाहकार ‘के. एम. मुंशी‘ थे।
  • इस संघ के उद्घाटनकर्ता ‘एन. वी. गाडगिल’ थे।
  • नवघटित मत्स्य संघ का प्रधानमंत्री शोभाराम कुमावत (अलवर) को, राजप्रमुख धौलपुर के महाराजा उदयभान सिंह को तथा राजधानी अलवर को बनाया गया।

2. द्वितीय चरण (पूर्व राजस्थान का निर्माण) – 25 मार्च 1948 ई.

  • 25 मार्च 1948 ई. को 9 रियासतों (बांसवाड़ा, बूंदी, डूंगरपुर, झालावाड़, किशनगढ़, कोटा, प्रतापगढ़, शाहपुरा एवम् टोंक) और 1 ठिकाना (कुशलगढ़) को मिलाकर पूर्व राजस्थान का निर्माण किया गया।पूर्व राजस्थान का निर्माण
  • पूर्व राजस्थान/संयुक्त राजस्थान प्रथम के उद्घाटनकर्ता ‘एन. वी. गाडगिल’ थे।
  • इसका प्रधानमंत्री गोकुल लाल ओसावा (शाहपुरा) को, राजप्रमुख कोटा नरेश भीम सिंह को तथा राजधानी कोटा को बनाया गया।
  • बांसवाड़ा नरेश चंद्रवीर सिंह ने इसमें शामिल होते समय कहा था- ‘मैं अपने मौत के परवाने/मृत्यु-अधिपत्र पर हस्ताक्षर कर रहा हूं’

3. तृतीय चरण (संयुक्त राजस्थान का निर्माण) – 18 अप्रैल 1948 ई.

  • 18 अप्रैल 1948 ई. को मेवाड़ (उदयपुर) रियासत का संयुक्त राजस्थान प्रथम में विलय करके’ संयुक्त राजस्थान’ का निर्माण किया गया।संयुक्त राजस्थान का निर्माण
  • संयुक्त राजस्थान के उद्घाटनकर्ता ‘पंडित जवाहर लाल नेहरू’ थे।
  • इसका प्रधानमंत्री माणिक्य लाल वर्मा (उदयपुर) को, राजप्रमुख मेवाड़ नरेश भूपाल सिंह को, उपराजप्रमुख भीम सिंह (कोटा नरेश) को तथा राजधानी उदयपुर को बनाया गया।

4. चतुर्थ चरण (वृहत् राजस्थान का निर्माण) – 30 मार्च 1949 ई.

  • 30 मार्च 1949 ई. को 4 बड़ी रियासतों (बीकानेर, जयपुर, जैसलमेर तथा जोधपुर) तथा ठिकाना (लावा) को संयुक्त राजस्थान द्वितीय में मिलाकर ‘वृहत् राजस्थान संघ’ का निर्माण किया गया।वृहत् राजस्थान का निर्माण
  • वृहत् राजस्थान के उद्घाटनकर्ता ‘सरदार वल्लभ भाई पटेल‘ थे।
  • चतुर्थ चरण राजस्थान का एकीकरण का सबसे महत्वपूर्ण चरण था।
  • इसका प्रधानमंत्री हीरालाल शास्त्री (जयपुर) को, राजप्रमुख जयपुर नरेश सवाई मानसिंह को तथा राजधानी जयपुर को बनाया गया।
  • मेवाड़ के प्राचीन राजवंश की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए मेवाड़ नरेश भूपाल सिंह को महाराजा प्रमुख का पद दिया गया।
  • 30 मार्च को बाद में राजस्थान दिवस घोषित किया गया।

5. पंचम चरण (संयुक्त वृहत् राजस्थान का निर्माण) – 15 मई 1949 ई.

  • 15 मई 1949 ई. को मत्स्य संघ को वृहत् राजस्थान में मिलाकर संयुक्त वृहत् राजस्थान का निर्माण किया गया।संयुक्त वृहत् राजस्थान का निर्माण
  • इसमें कुल 18 रियासतें और 3 ठिकाने थे।
  • इस चरण के द्वारा प्रधानमंत्री पद की जगह मुख्यमंत्री पद का सृजित किया गया।
  • इसमें मुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री को मनोनीत किया गया। ‘हीरालाल शास्त्री राजस्थान के एकमात्र मनोनीत और निर्वाचित मुख्यमंत्री रहे है‘।
  • इसके राजप्रमुख तथा राजधानी पूर्ववत वृहत् राजस्थान के ही रखे गए।

6. षष्टम चरण (राजस्थान संघ का निर्माण) – 26 जनवरी 1950 ई.

  • 26 जनवरी 1950 ई. को भारत के गणतंत्र की स्थापना के शुभ अवसर पर अकेली बची सिरोही रियासत को संयुक्त वृहत् राजस्थान में मिलाकर राजस्थान संघ का निर्माण किया गया।
    राजस्थान संघ - राजस्थान का एकीकरण
    राजस्थान संघ – राजस्थान का एकीकरण
  • इसमें मुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री को तथा राजप्रमुख जयपुर नरेश सवाई मानसिंह को ही रखा गया।

7. सप्तम चरण (वर्तमान राजस्थान का स्वरूप) – 1 नवम्बर 1956 ई.

  • 1 नवम्बर 1956 ई. को राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 लागू किया गया।
    • इस अधिनियम के तहत कोटा जिले का सिरोंज तहसील मध्यप्रदेश में चला गया और अजमेर-मेरवाड़ा, आबू एवम् मध्यप्रदेश राज्य के मंदसौर जिले की भानपुरा तहसील का सुनेल टप्पा भाग राजस्थान संघ में मिला दिया गया।वर्तमान राजस्थान का स्वरूप
  • जयपुर को राजस्थान की राजधानी बनाया गया।
  • मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया को निर्वाचित किया गया।
  • राजप्रमुख की जगह राज्यपाल पद सृजित किया गया।
  • प्रथम राज्यपाल ‘गुरुमुख निहाल सिंह’ को बनाया गया।

राजस्थान का एकीकरण - महत्वपूर्ण तथ्य

पहली और आखिर रियासत

  • रियासती विभाग की स्थापना जुलाई 1947 में की गई थी तथा इसका अध्यक्ष सरदार वल्लभ भाई पटेल को बनाया गया था।
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ी रियासत जोधपुर (मारवाड़) थी।
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटी रियासत शाहपुरा थी।
  • जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़ी रियासत जयपुर थी।
  • जनसंख्या की दृष्टि से सबसे छोटी रियासत शाहपुरा थी।
  • मेवाड़ (उदयपुर) रियासत सबसे प्राचीन थी।
  • झालावाड़ सबसे नवीन रियासत थी।
  • जयपुर प्रथम रियासत थी जिसने 1904 ई. में पोस्टकार्ड और डाक टिकट जारी किया था।
  • 15 नवम्बर 1817 ई. को करौली रियासत ने सबसे पहले अंग्रेजो के साथ संधि की थी।
  • अंगेजो के साथ संधि करने वाली अंतिम रियासत सिरोही (सितंबर 1823 ई.) थी।
  • 1901 ई. में टोंक रियासत ने सबसे पहले शिकार कानून पारित किया था।
  • 1935 ई. में अलवर रियासत ने सबसे पहले वन्य अधिनियम पारित किया था।
  • डूंगरपुर रियासत ने सबसे पहले अंग्रेजी शिक्षा पर प्रतिबन्ध लगाया था।
  • एकीकरण के समय पाकिस्तान में मिलने की इच्छुक रियासते टोंक और जोधपुर थी।
  • राज्य की सबसे पिछड़ी रियासत जैसलमेर थी, इसे राजस्थान का अंडमान भी कहा जाता था। 1942 ई. के भारत छोड़ो आन्दोलन में इस रियासत ने हिस्सा नहीं लिया था।

राजस्थान का एकीकरण

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