राजस्थान की नदी घाटी परियोजनाएं | River Projects in Rajasthan

राजस्थान के सरकारी विभागों द्वारा आयोजित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से राजस्थान की नदी घाटी परियोजनाएं बहुत ही महत्वपूर्ण है। सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में इसमें से प्रश्न अवश्य पूछे जाते है।

राजस्थान की नदी घाटी परियोजनाएं

नदी घाटी परियोजनाएं राज्य  की पवित्र मरू-भूमि में प्रमुख रूप से पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की समस्या के निराकरण के लिए शुरू की गई केन्द्रीय और राज्य सरकारों की पहल है।

प्रमुख राजस्थान की नदी घाटी परियोजनाएं निम्नानुसार हैं-

इंदिरा गाँधी नहर परियोजना (IGNP)

  • यह परियोजना राजस्थान की मरु गंगा एवं जीवन रेखा कहलाती है।
  • इंदिरा गाँधी नहर परियोजना के योजनाकार श्री कँवरसेन (बीकानेर रियासत के मुख्य सिंचाई अभियंता) थे।
  • इंदिरा गाँधी नहर परियोजना विश्व की सबसे बड़ी (मानव निर्मित) सिंचाई नहर परियोजना है।
  • इस नहर के दो भाग हैं- राजस्थान फीडर व मुख्य नहर।
  • इंदिरा गाँधी नहर के लिए प्रेरणा गंग नहर (1927 ई.) से मिली थी।
  • इस नहर का उद्गम पंजाब में फिरोजपुर के पास सतलुज व व्यास नदियों के संगम पर स्थित हरिके बैराज से होता है।
  • इंदिरा गाँधी नहर परियोजना का उद्घाटन तत्कालीन ग्रहमंत्री गोविंद वल्लभ पंत के द्वारा 31 मार्च 1958 को किया गया था।

चम्बल परियोजना

  • चम्बल परियोजना राजस्थान की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना है।
  • मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच चम्बल जल समझौते के तहत् दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की अध्यक्षता में नियंत्रण बोर्ड स्थापित किया गया है। इस अंतर्राज्यीय कंट्रोल बोर्ड का निर्देशन दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री बारी-बारी से करते हैं।
  • चम्बल परियोजना परियोजना को वर्ष 1953-54 में प्रारम्भ किया गया।
  • राजस्थान और मध्यप्रदेश दोनों का चम्बल परियोजना में 50% हिस्सा है।
  • चम्बल परियोजना में चम्बल नदी पर चार बांध निर्मित किए गए है-
    1. गाँधीसागर बांध – मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में भानपुरा के निकट
    2. राणा प्रताप सागर बाँध – राजस्थान में रावतभाटा
    3. जवाहर सागर बाँध – कोटा में बोराबास क्षेत्र
    4. कोटा बैराज – राजस्थान में कोटा

माही बजाज सागर परियोजना (जमनालाल बजाज सागर परियोजना)

  • यह राजस्थान और गुजरात की साझी परियोजना है, जिससे राज्य के दक्षिणी जिलों (प्रमुखतया डूंगरपुर, बाँसवाड़ा) में पेयजल एवं सिंचाई सुविधा सिंचाई उपलब्ध कराई जाती है।
  • इस परियोजना में राजस्थान का 45% तथा गुजरात का 55% हिस्सा है।
  • माही बजाज सागर परियोजना से राजस्थान में सर्वाधिक लाभान्वित जिला बाँसवाड़ा है।
  • इस परियोजना के अंतर्गत माही नदी पर निर्मित बाँध बोरखेड़ा (बाँसवाड़ा) में माही बजाज सागर बाँध और गुजरात में कडाना बाँध है।
  • माही बजाज सागर बाँध राजस्थान में दूसरा सबसे ऊंचा बाँध है।

भाखड़ा नांगल परियोजना

  • यह राजस्थान, पंजाब और हरियाणा की संयुक्त परियोजना है।
  • इस परियोजना में हिमाचल प्रदेश का हिस्सा केवल जल विद्युत के उत्पादन में ही है।
  • इस परियोजना में राजस्थान की हिस्सेदारी 15.22% है।
  • भाखड़ा नांगल भारत की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना है।
  • भाखड़ा नाँगल परियोजना में सतलज नदी पर भाखड़ा एवं नाँगल स्थानों पर दो बाँध बनाए गए हैं-

(1) भाखड़ा बाँध (1946 ई.)

  • सतलज नदी पर होशियारपुर जिले में भाखड़ा स्थान पर इस बाँध का निर्माण किया गया है।
  • यह बाँध विश्व का दूसरा एवं एशिया का सबसे ऊँचा कंक्रीट निर्मित गुरुत्व सीधा बाँध है।
  • इसकी आधारशिला 17 नवम्बर, 1955 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू ने रखी तथा निर्माण अमरीकी बाँध निर्माता हार्वे स्लोकेम के निर्देशन में अक्टूबर, 1962 में पूर्ण हुआ।
  • भाखड़ा बाँध भारत का सबसे ऊँचा बाँध है।
  • इस बाँध के पीछे बिलासपुर (हिमाचल) में बने विशाल जलाशय का नाम गोविन्द सागर है।
  • भाखड़ा बाँध की ऊँचाई 55 मीटर (740 फीट), लम्बाई 518.16 मीटर (1700 फीट) और चौड़ाई 9.14 मीटर (30 फीट) है।

(2) नाँगल बाँध

  • नाँगल बाँध 1952 में बनकर तैयार हो गया था।
  • यह भाखडा बाँध से 12 किमी. दूर नांगल (रोपड़, पंजाब) नामक स्थान पर स्थित है।
  • नाँगल बाँध की ऊँचाई – 29 मीटर (95 फीट) और लम्बाई – 8 मीटर (1000 फीट) है।

व्यास परियोजना

  • यह सतजल, रावी व व्यास नदियों के जल का उपयोग करने हेतु पंजाब, राजस्थान व हरियाणा की संयुक्त परियोजना है।
  • इस परियोजना में हिमाचल प्रदेश में पंडोह बाँध तथा पोंग नामक स्थान पर पोंग बाँध (रणजीत सागर बाँध) का निर्माण किया गया है।
  • इंदिरा गांधी नहर परियोजना को स्थाई रूप से जल आपूर्ति नियमित बनाये रखना इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य है।

बीसलपुर परियोजना

  • टोंक जिले में स्थित बीसलपुर परियोजना राजस्थान की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना है।
  • बीसलपुर परियोजना को 1988-89 में शुरू किया गया।
  • बीसलपुर परियोजना का प्रमुख उद्देश्य ब्यावर (अजमेर), मारवाड़, नागौर और जयपुर को पेयजल उपलब्ध करना है।
  • इस परियोजना के द्वारा जयपुर शहर को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए टोंक जिले के सूरजपुरा से जयपुर तक पाइप लाइन का निर्माण किया गया है।

जवाई परियोजना

  • पाली जिले में स्थित इस परियोजना का उद्देश्य जोधपुर और पालि को पेयजल एवं सिंचाई के लिए जल की आपूर्ति करना है।
  • जवाई बाँध पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध है।
  • जवाई बाँध को मारवाड़ का अमृत सरोवर या मानसरोवर भी कहा जाता है।

जाखम परियोजना

  • यह परियोजना प्रतापगढ़ जिले की प्रमुख नदी घाटी परियोजना है।
  • जाखम परियोजना में प्रतापगढ़ के अनुपपुरा नामक स्थान पर जाखम बाँध स्थित है, जो की राजस्थान का सबसे ऊँचा बाँध है, जिसकी ऊँचाई 81 मीटर है।

नर्मदा नहर परियोजना

  • यह गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान की संयुक्त परिजोजना है।
  • इस नहर की कुल लंबाई 532 किमी. है, जिसमें राजस्थान में इसकी लंबाई 74 किमी. है।
  • इस नहर के द्वारा राजस्थान के जालोर और बाड़मेर जिलों के 233 गांवों में सिंचाई तथा 1107 गांवों को पेयजल की आपूर्ति की जाती है।
  • यह नहर साँचोर तहसील के सीलू गाँव के नर्मदा घाट से राजस्थान में प्रवेश करती है।
  • नर्मदा नहर परियोजना राजस्थान की पहली पूर्णतः फव्वारा पद्धति वाली परियोजना है।
  • इस नहर के द्वारा साँचोर, भादरेड़ा और पनोरिया लिफ्ट नहर निकाली गई हैं।

भीखाभाई सागवाड़ा नहर परियोजना

  • यह नहर माही नदी से निकाली गई है।
  • इस नहर के द्वारा डूँगरपुर जिले के सागवाड़ा क्षेत्र को सिंचाई और पेयजल की आपूर्ति की जाती है।

पाँचना बाँध

  • यह बाँध करौली में पाँच नदियों बद्रवती, भैसवाट, अटा, भानची और बरखेड़ के संगम पर स्थित है।
  • “पाँचना बाँध” मिट्टी से निर्मित राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध है।

राजस्थान की नदी घाटी परियोजनाएं 

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